हिन्दी के कवि

अब्दुर्रहमान (अद्दहमाण)

(11वीं शताब्दी का पूर्वार्ध्द)

अब्दुर्रहमान मुलतान के निवासी थे। इनके पिता का नाम मीर हुसैन था। ये अवहट्ट भाषा के कवि हैं। 'संदेश रासक या 'संदेशक रास नाम की इनकी प्रसिध्द कृति है। यह एक दूतकाव्य है। नगर वर्णन, ॠतु वर्णन और यथार्थ निरूपण के कारण इस ग्रंथ का बहुत आदर है। समसामयिक जीवन को व्यक्त करने में कवि अधिक सफल रहा है। ये भाषा काव्य के प्रथम मुसलमान कवि हैं।

वर्षा

इमि तपिअउ बहु ग्रीष्म सकौं कस बोलियऊ।
पथिक! आव पुनि पावस ढीठ न आव पियऊ ।

चौदिसि घोरंधार छाय गउ गरुअ-भरो।
गगन-कुहर घुरघुरै सरोषउ अंबुधरो॥

वक छाडिय सलिल-हृद तरु शिखरहिं चढेऊ ।
तांडव करिय शिखंडिहि वर शिखरे रटेऊ ।

सलिलेहिं वर शालूरेंहि परसेउ रसेउ स्वरे।
कल कल किउ कल कंठहिं चढि आमहि शिखरे॥

 

 

 

 

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