हिन्दी के कवि

अनूप शर्मा

(1899-1966 ई.)

अनूप शर्मा का जन्म नवीन नगर, सीतापुर में हुआ। इन्होंने 'सिध्दार्थ, 'फेरि मिलिबो, 'वर्धमान आदि कथा-काव्य लिखे हैं। 'सुमनांजलि कवित्त छंद में लिखा स्फुट-काव्य संग्रह है, जिस पर रीतिकालीन शैली का प्रभाव है। इन्हें 'फेरि मिलिबो पर 'देव पुरस्कार मिला। अनूप शर्मा भाषा और शैली में 'हरिऔध के निकट हैं।

चित्तौड-दर्शन

जागी वीरता की दिव्य ज्योति मही-मंडल में
भागी भीरुता की भारी भ्रांति-भरी भूतिनी।
घोर घहराई महातुमुल-निनादिनी हो
भूमि हहराई वीर-पुंगव-प्रसूतिनी।
पा गई पवित्रता त्रिकूट से भी पुण्यतर
चित्रकूट-भूमि बल-विभव-विभूतिनी।
गगन-गिरा ने प्रतिध्वनित निनाद किया,
'धन्य राजपूत धन्य धन्य राजपूतिनी॥

सुमन

कुसुमित होते फूलते हो मुरझाते तुम,
सुमन कभी तो एक-दो दिन जिया करो।
आते मधु पीने को अनेक चंचरीक उन्हें,
गतमधु होकर निराश न किया करो।
होकर प्रचालित प्रभात के पवन द्वारा,
झूम-झूम झोंके मंद-मंद ही लिया करो।
देख निज जीवन-रहस्य अपने में छिपा,
हंस पडते हो, कभी बोल भी दिया करो॥

 

 

 

 

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