हिन्दी के कवि

जगन्नाथप्रसाद 'मिलिंद

(1907-1986 ई.)

जगन्नाथप्रसाद 'मिलिंद का जन्म मुरार, ग्वालियर में हुआ। उच्च शिक्षा काशी में हुई। ये हिंदी, उर्दू, बंगला, मराठी, गुजराती, संस्कृत और अंग्रेजी के ज्ञाता थे। इन्होंने शांति निकेतन तथा महिला आश्रम, वर्धा में अध्यापन किया एवं स्वतंत्रता आंदोलन तथा राजनीति में भाग लिया। 'मिलिंद के 6 नाटक (मुख्य 'प्रताप प्रतिज्ञा), 2 खंड-काव्य, अनेक समीक्षा ग्रंथ तथा 8 काव्य-संग्रह प्रकाशित हैं, जिनमें 'अंतिमा, 'पूर्णा, 'बलिपथ के गीत, 'नवयुग के गान और 'मुक्ति के स्वर मुख्य हैं। इन्हें 'साहित्य-वाचस्पति तथा 'भारत-भाषा-भूषण की उपाधि और अनेक साहित्य संस्थानों में सम्मान प्राप्त हुआ।

उगता राष्ट्र

मेरे किशोर, मेरे कुमार!
अग्निस्फुलिंग, विद्युत् के कण, तुम तेजपुंज, तुम निर्विषाद,
तुम ज्वालागिरि के प्रखर स्रोत, तुम चकाचौंध, तुम वज्रनाद,
तुम मदन-दहन दुर्धर्ष रुद्र के वह्निदीप्त दृग के प्रसाद,
तुम तप-त्रिशूल की तीक्ष्ण धार!
मेरे किशोर, मेरे कुमार!
तुम नवजाग्रत उत्साह, तीव्र उत्कंठा, उत्सुक अथक प्राण,
तुम जिज्ञासा उद्दाम, विश्व-व्यापक बनने के अनुष्ठान,
उच्छृंखल कौतूहल, जीवन के स्फुरण, शक्ति के नव-निधान,
तुम चिर-अतृप्ति, अविरत सुधार।
मेरे किशोर, मेरे कुमार!
अक्षय संजीवन-प्रद मद से कर अंतरतर भूरपूर, शूर,
तुम एक चरण में भय, चिंता, संदेह, शोक कर चूर-चूर,
प्राणों की विप्लव-लहर विश्व में पहुंचा देते दूर-दूर।
तुम नवयुग के ॠषि, सूत्रधार।
मेरे किशोर, मेरे कुमार!

 

 

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