हिन्दी के कवि

जयप्रकाश खत्री 'नवल

(जन्म 1940 ई.)

जयप्रकाश खत्री 'नवल का जन्म अमृतसर में हुआ, किंतु आरम्भ से ही ये कलकत्ता में रहे। बैंक में सेवारत रहते हुए भी ये साहित्य-सृजन के प्रति समर्पित हैं। इनकी कविताओं में जीवन के कटु यथार्थ के साथ सौंदर्य के प्रति सहज आसक्ति है। इनके कविता-संग्रह हैं : 'ऐसा-क्यों, 'सांप सीढी, 'तुमसे अलग नहीं तथा' आधी रात का शहर। इन्होंने कई काव्य-संग्रहों का संपादन भी किया है।

एक बार
एक बार
मैंने सूरज से कहा
तुम उगना बंद क्यों नहीं कर देते
अगर तुम उगो नहीं
तो सारा संसार
बिखर जाए!

एक बार
मैंने फूलों से कहा
तुम खिलना बंद क्यों नहीं कर देते
अगर तुम खिलो नहीं
तो सारे संसार का उल्लास
बर्फ हो जाए!

एक बार
मैंने बादलों से कहा
तुम बरसना बंद क्यों नहीं कर देते
अगर तुम बरसो नहीं
तो सारा संसार
चुप हो जाए!

एक बार
मैंने परिंदों से कहा
तुम उडना बंद क्यों नहीं कर देते
अगर तुम उडों नहीं
तो सारा संसार
यांत्रिकता में बदल जाए!

शायद सूरज, फूलों, बादलों
और परिंदों ने मेरी बात सुनी नहीं
अगर वे सुन पाते
तब वे जान पाते
कि वे कितना कुछ कर सकते हैं
और संसार उनका मुहताज है!

मैं हैरान हो सोचता रहा
कि वे, जो अनायास करते रहते हैं,
कुछ नहीं सोचते
और जो कुछ भी नहीं कर सकते
वे कितना परेशान होते हैं
अपने खोखले दम्भ में पडे रहकर!

 

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