हिन्दी के कवि

माखनलाल चतुर्वेदी

(1889-1968 ई.)

माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म बावई, होशंगाबाद (म.प्र.) में हुआ। इन्होंने हिंदी एवं संस्कृत का अध्ययन-अध्यापन किया। ये 'कर्मवीर राष्ट्रीय दैनिक के संपादक थे। इन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। इनका उपनाम 'एक भारतीय आत्मा है। मुख्य कृतियां हैं- 'हिम-किरीटिनी, 'हिम-तरंगिनी (कविता संग्रह), 'साहित्य-देवता (गद्य काव्य) तथा 'कृष्णार्जुन युध्द (नाटक)। 'हिम-तरंगिनी पर इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। राष्ट्रीयता इनके काव्य का कलेवर है तथा रहस्यात्मक प्रेम उसकी आत्मा।

पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं मैं सुरबाला के
गहनों में गूंथा जाऊं,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में
बिंध प्यारी को ललचाऊं,
चाह नहीं, सम्राटों के शव
पर हे हरि, डाला जाऊं,
चाह नहीं, देवों के सिर पर
चढूं भाग्य पर इठलाऊं।
मुझे तोड लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढाने
जिस पथ जावें वीर अनेक

वायु

चल पडी चुपचाप सन-सन-सन हवा,
डालियों को यों चिढाने-सी लगी,
आंख की कलियां, अरी, खोलो जरा,
हिल स्वपतियों को जगाने-सी लगी,

पत्तियों की चुटकियां झट दीं बजा,
डालियां कुछ ढुलमुलाने-सी लगीं।
किस परम आनंद-निधि के चरण पर,
विश्व-सांसें गीत गाने-सी लगीं।
जग उठा तरु-वृंद-जग, सुन घोषणा,

पंछियों में चहचहाट मच गई,
वायु का झोंका जहां आया वहां-
विश्व में क्यों सनसनाहट मच गई?


 

 

 

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