हिन्दी के कवि

नीरेन्द्र नाथ चक्रवर्ती

बांग्ला से अनुवाद: मुनमुन सरकार

कलकत्ते का ईसा मसीह
लालबत्ती ने कोई निषेध नहीं प्रकट किया
फिर भी तूफान की गति से धावमान
कलकत्ता शहर
अतर्कित ठहर गया।
ट्रैफिक के दुर्दांत भयंकर धक्के को झेलते
रुके रहे टैक्सी, प्राइवेट कार
टेम्पो, बाघमार्का डबलडेकर
गया... ओ... गया केर् आत्तनाद के साथ
रास्ते के दोनों किनारों से दौडे
बोझ उठाए मजदूर, फेरीवाले,
कुछ विक्रेता, कुछ खरीददार
पर अभी वे भी जैसे स्थिर चित्र से
शिल्पी के ईजल पर मगन
दिख रहे हैं।
स्तब्ध देख रहे हैं सभी
डगमगाते छोटे-छोटे पांवों से
रास्ते के एक छोर से दूसरे की ओर
पैदल चला जा रहा
नंगधंडग एक शिशु
कुछ क्षण पहले ही चौरंगी को भिगा गई है
रिमझिमी बरसात
धूप अपने तीक्ष्ण भाले से चीर मेघ का दिल
नीचे उतर रही है।
मायावी प्रकाश में डूबा जा रहा है
शहर कलकत्ता
स्टेट बस की खिडकी पर ठुढ्डी टिकाए
एक बार ताकता हूँ आकाश की ओर।
फिर देखता हूँ तुम्हें
भिखारिणी मां का लाडला शिशु
कलकत्ते का ईसा मसीह 'यीशु
सारे वाहनों को रोक दिया तुमने
जैसे किसी मंत्रबल से
जनता कार् आत्तनाद, असहिष्णु ड्राइवर काआक्रोश
पर तुम इन सबसे निरपेक्ष
दोनों ओर हाथ फैलाए तैयार मृत्यु
उसके बीच हिलते-डुलते
चलते चले जा रहे हो
जैसे मूर्तिमान मानवता, नया-नया सीख रही हो
धरती पर चलना
और इस अकथ्य आनंद में तुम
पा लेना चाहते हो सारी पृथ्वी को
अपनी बंद मुट्ठी में
जैसे तभी डगमग पैरों से तुम नापने निकल पडे हो
पृथ्वी को इस किनारे से उस किनारे तक।

 

 

 

 

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