हिन्दी के कवि

श्रीधर पाठक

(1859-1928 ई.)

श्रीधर पाठक का जन्म आगरा जिले के जौंधरी ग्राम में हुआ। शिक्षा संस्कृत और फारसी में हुई। कलकत्ता में सरकारी सेवा करने के पश्चात ये प्रयाग में आकर रहने लगे। इन्होंने ब्रजभाषा तथा खडी बोली दोनों में कविता लिखी। इनकी मुख्य रचनाएं हैं- 'जगत सचाई-सार, 'मनोविनोद, 'काश्मीर सुषमा, 'गोपिका-गीत एवं 'भारत-गीत। खडी बोली में काव्य रचना कर इन्होंने गद्य और पद्य की भाषाओं में एकता स्थापित करने का ऐतिहासिक कार्य किया। इन्होंने अंग्रेजी तथा संस्कृत की पुस्तकों के पद्यानुवाद भी किए। ये प्राकृतिक सौंदर्य, स्वदेश प्रेम तथा समाज सुधार की भावनाओं के कवि हैं।

भारत गीत

जय जय प्यारा, जग से न्यारा
शोभित सारा, देश हमारा,
जगत-मुकुट, जगदीश दुलारा
जन-सौभाग्य सुदेश।
जय जय प्यारा भारत देश।

प्यारा देश, जय देशेश,
अजय अशेष, सदय विशेष,
जहां न संभव अघ का लेश,
केवल पुण्य प्रवेश।
जय जय प्यारा भारत देश।

स्वर्गिक शीश-फूल पृथ्वी का,
प्रेम-मूल, प्रिय लोकत्रयी का,
सुललित प्रकृति-नटी का टीका,
ज्यों निशि का राकेश।
जय जय प्यारा भारत देश।

जय जय शुभ्र हिमाचल शृंगा,
कलरव-निरत कलोलिनि गंगा,
भानु-प्रताप-चमत्कृत अंगा,
तेज-पुंज तपदेश।
जय जय प्यारा भारत-देश।

जग में कोटि-कोटि जुग जीवे,
जीवन-सुलभ अमी-रस पीवे,
सुखद वितान सुकृत का सीवे,
रहे स्वतंत्र हमेश।
जय जय प्यारा भारत देश।

 

 

 

 

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