हिन्दू समाज के इन विषयों पर आप क्या कहते हैं?

1 धर्म बड़ा है या जाति? अगर धर्म बड़ा है तो जातिगत आधार पर हम अलग-अलग खड़ा होकर अपने धर्म को कमजोर क्यूँ करते हैं, इस तोड़ने वाली व्यवस्था को छोड़कर जोड़नेवाली़ व्यवस्था को क्यों नहीं पुनर्जीवित करते।
2 आप योग्यता आधारित समाज (जो हमारी पुरानी वैदिक व्यवस्था थी) को पुनः क्यों नहीं स्वीकार करते जो ज्यादा प्रेमपूर्ण व्यवस्था थी। आज हम उत्तरवैदिक व्यवस्था को स्वीकार किये हैं। व्यवस्था परिवर्तन उत्तरवैदिक की आवश्यकता थी तो क्या आज इस व्यवस्था परिवर्तन की आवश्यकता नहीं है।
3 दहेज बुरा है सभी मानते हैं, फिर इसे खत्म करने की सामाजिक पहल की जाए तो आप साथ देंगे। आप कौन सा तरीका दे सकते हैं समाज को दहेज मुक्ति का।
4 हमारा सुझाव है शादी में भोज व्यवस्था खत्म की जाए क्योंकि भोज, गहना यही सब दहेज को प्रासंगिक बनाने लगते हैं और दहेज फिर कन्या भ्रुण हत्या का कारण बनता है। अगर समाज या दोनों पक्ष के मेहमानों को भोज अनिवार्य प्रतीत हो तो भोज हो परंतु दोनों पक्ष के मेहमान ही इस खर्च को उठाएं। समाज में जिन्हें इस भोज व्यवस्था को खत्म करने से एतराज हो वह अपनी संपत्ति से इस खर्च को पूरा करें या समाज उनकी इच्छानुसार उनकी संपत्ति को बेचकर उन महाशय के पसंदानुसार समाज के बच्चियों के शादी का उत्सव करे।
7 विवाह में सिर्फ नजदीकी रिश्तेदार हों। इससे भी शादी का खर्च कम होगा। शादी का निबंधन कोर्ट में या समाज द्वारा निश्चित संस्था से हो ताकि भविष्य में समस्या न हो। गहने का रिवाज बिल्कुल खत्म की जाए। समाज दहेज एवं गहना इन दो मुद्दों पर सामाजिक बहिष्कार करे।
8 हम  मानते है कि सम-योग्य लड़का-लड़की चाहे वे किसी भी जाति धर्म से रहें, शादी की इजाजत देनी चाहिए ताकि ज्यादा विकल्प होने से दहेज प्रथा एवं इसकी वजह से होने वाली कन्या भ्रूण-हत्या की आवश्यकता हीं न हो। आप क्या कहते हैं?
9 अयोग्य पुरूष (नपुंसक, नशाबाज) से विवाह करने के बजाय लड़की अगर अविवाहित रहना पसंद करती है तो क्या आप उसे समर्थन देंगे। अगर नहीं तो क्या आप उसके लायक (लड़की के अनुसार लायक) वर के विवाह का खर्च उठाएंगे।
10 नपुंसक पुरूष से विवाह की स्थिति में समाज उस युवती के हित में क्या स्थापना देता है। क्या समाज उस युवती को अविवाहित मानेगा। आप क्या उपाय सोचते हैं।
11 समाज में इसके लिए शपथ संहिता का निर्माण हो जिसमें 16 वर्ष से अधिक आयु के सभी का शपथ हो ताकि उन्हें बाध्य किया जा सके।

12 क्या स्वजाति हमेशा मददगार होते हैं और दूसरे जाति वाले दुश्मन? आपका व्यक्तिगत अनुभव क्या कहता है। व्यक्तिगत रूप से आप किन से पीड़ित हैं। आप किस प्रकार अपनी जाति को दूसरे से श्रेष्ठ मानते हैं?

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