सम्यक समाज

आज एक सामान्य मान्यता है कि हिन्दू समाज में युगानुकूल सामाजिक सुधार इसके वर्तमान स्वरूप में संभव नहीं रह गया है। जबकि युगानुकूलन अपरिहार्य है। यह किसी भी एक से संभव नहीं परंतु हम युवा इसे कर सकते हैं। इसी विश्वास के साथ मैंने सम्यक समाज की स्थापना की है। आज का हिन्दू समाज बिखरा एवं हमारी समस्याओं को कम करने में पूरी तरह से सक्षम नहीं हो पा रहा है। लोग ढ़ोंग छोड़ने को तैयार नहीं हैं। सामाजिक सच स्वीकार करने की इच्छा नहीं है जिससे कई मानसिक जटिलताओं से युवाओं को गुजरना पड़ता है। इस दुविधापूर्ण स्थिति में जिंदगी की स्वाभाविकता करीब-करीब समाप्त हो जाती है। हिन्दू समाज के बिखराव के मूल कारण में समय के साथ नियम, परंपरा में परिर्वतन का न होना भी है। हमें यह भी याद रखनी चाहिए कि सुधार की गुंजाइश न देखते हुए हीं बाबा सहब अंबेदकर को अपने अनुयायियों के साथ हिन्दू धर्म छोड़ना पड़ा था। वो बिखराव आज भी जारी है। अतः अब हिन्दू समाज को अपने कई रीति-रिवाजों में सामयानुकूल परिवर्तन करना अनिवार्य हो गया है। शादी-विवाह, जाति जैसे मुद्दों पर फिर से नयी व्यवस्था की अत्यंत आवश्यकता है। उदाहरण के तौर पर वैवाहिक रिश्तों में समान वेब-लेंथ का होना महत्वपूर्ण माना जाए न कि जाति। अभी वैवाहिक रिश्ते अपनी जाति में ही करने की परंपरा के कारण विकल्प काफी सीमित हो जाते हैं फलरूवरूप कन्या विवाह तय करने में दहेज और अन्य जद्दोजहद, कन्या भ्रूण-हत्या की बढ़ती समस्या सामने है। मानसिकता बदलनी होगी, व्यवस्था बदलनी होगी तभी लैंगिक विभेद मिटेगा। जब व्यवस्था स्त्रियों से संबंधित हो तो एक समय विशेष के बाद व्यवस्था में समायोजन की आवश्यकता होती है। भगवान बुद्ध ने इसी को लक्ष्य करके एक कालखंड के उपरांत व्यवस्था में नये अचार विचार की आवश्यकता को लक्षित किया था। यह महापरिनिर्वाण के समय परिव्रजक सुभद्र के साथ उनकी वार्ता में निहित है। समाज के काफी सारे लोग जाति परंपरा को दिल से नहीं स्वीकारते पर चलती परंपरा को नहीं तोड़ पाते। अतः नयी व्यवस्था के लिए हम युवाओं को ही पहल करनी होगी जो ज्यादा प्रासंगिक होगी और हमारी सांसारिक सामाजिक जीवन के जरूरतों के हिसाब से होगी और उसे सामाजिक मान्यता एवं धार्मिक व्यवस्था दिलानी होगी। पहल हमारी ओर से होनी चाहिए क्योंकि सांसारिक सामाजिक भैतिक जीवन हम जीते हैं। अतः आप-हम खुद ही मिलकर स्वाभाविक सामाजिक नियम बनाएं जो सामाजिक वैश्विक व्यवस्था में आप-हमको सुख एवं सुविधा के साथ तनावमुक्त होकर जीने की व्यवस्था दे सके। जो हमारे रोजगार की व्यवस्था में सहायक हो सके। आइए हमसब मिलकर इस प्रयास को सफल बनाएं जो आपके नैतिक और सक्रिय सहयोग के बिना असंभव है।

आपके साथ की आकांक्षा के साथ -
प्रभात कुमार
संस्थापक
सम्यक समाज डॉट कॉम
www.samyaksamaj.com