
राग नट
नंद-घरनि ! सुत भलौ पढ़ायौ |
ब्रज-बीथिनि, पुर-गलिनि, घरै-घर, घाट-बाट सब सोर मचायौ ||
लरिकनि मारि भजत काहू के, काहू कौ दधि-दूध लुटायौ |
काहू कैं घर करत भँड़ाई, मैं ज्यौं-ज्यौं करि पकरन पायौ ||
अब तौ इन्है जकरि धरि बाँधौं, इहिं सब तुम्हरौ गाउँ भजायौ |
सूर स्याम-भुज गहि नँदरानी, बहुरि कान्ह अपनैं ढँग लायौ ||
भावार्थ :-- (गोपी कहती है-) `नन्दरानी ! तुमने पुत्रको अच्छी शिक्षा दी है व्रजकी
गलियोंमें, नगरके मार्गोमें, घर-घरमें, घाटोंपर, कच्चे रास्तोंमें-सब कहीं उसने
हल्ला (ऊधम) मचा रखा है | किसीके लड़कोंको मारकर भाग जाता है, किसीका दूध-दही
लुटा देता है, किसीके घरमें घुसकर ढूँढ़-ढ़ाँढ़ करता है, जैसे-तैसे करके मैं इसे
पकड़ सकी हूँ | अब तो इसे जकड़कर बाँध रखो, इसने तुम्हारे सारे गाँवको भगा दिया
(इसके ऊधमसे तंग होकर सब लोग गाँव छोड़कर जाने लगे)|' सूरदासजी कहते हैं कि
श्रीनन्दरानीने श्यामसुन्दरका हाथ पकड़ लिया; किंतु कन्हाई तो फिर अपने ही ढंगमें
लग गये (पूर्ववत् ऊधम करते रहे) |
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217