
राग नट
अनत सुत! गोरस कौं कत जात ?
घर सुरभी कारी-धौरी कौ माखन माँगि न खात ||
दिन प्रति सबै उरहनेकैं मिस, आवति हैं उठि प्रात |
अनलहते अपराध लगावति, बिकट बनावति बात ||
निपट निसंक बिबादित सनमुख, सुनि-सुनि नंद रिसात |
मोसौं कहति कृपन तेरैं घर ढौटाहू न अघात ||
करि मनुहारि उठाइ गोद लै, बरजति सुत कौं मात |
सूर स्याम! नित सुनत उरहनौ, दुखख पावत तेरौ तात ||
भावार्थ :-- (माता कहती हैं-) पुत्र ! तुम दूसरोंके यहाँ गोरसके लिये क्यों जाते
हो ? घर पर ही तुम्हारी कृष्णा और धवला गायोंका मक्खन (बहुत) है, उसे माँग कर
क्यों नहीं खा लिया करते ?
ये सब (गोपियाँ) प्रतिदिनसबेरे-सबेरे उलाहना देनेके बहाने उठकर चली आती हैं | अन
होने दोष लगाती हैं, अद्भुत बातें बनाती (गढ़ लेती) हैं ये सर्वथा निःशंक हैं,
सामने होकर झगड़ा करती है, तेरे घर तेरे पुत्रका भी पेट नहीं भरता |' सूरदासजी कहते
हैं कि इस प्रकार माता पुत्रको उठाकर गोदमें ले लेती हैं और उसकी मनुहार (विनती-
खुशामद) करके रोकती हैं कि `श्यामसुन्दर ! नित्य उलाहना सुननेसे तुम्हारे पिता दुःख
पाते (दुःखी होते) हैं |'
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217