
हरि सब भाजन फोरि पराने |
हाँक देत पैठे दै पेला, नैकु न मनहिं डराने ||
सींके छोरि, मारि लरिकन कौं, माखन-दधि सब खाइ |
भवन मच्यौ दधि-काँदौ, लरिकनि रोवत पाए जाइ ||
सुनहु-सुनहु सबहिनि के लरिका, तेरौ-सौ कहुँ नाहि |
हाटनि-बाटनि, गलिनि कहूँ कोउ चलत नहीं, डरपाहिं ||
रितु आए कौ खेल, कन्हैया सब दिन खेलत फाग |
रोकि रहत गहि गली साँकरी, टेढ़ी बाँधत पाग ||
बारे तैं सुत ये ढँग लाए, मनहीं-मनहिं सिहाति |
सुनै सूर ग्वालिनि की बातैं, सकुचि महरि पछिताति ||
श्यामसुन्दर ललकारते हुए बलपूर्वक (गोपीके घरमें) घुस गये, तनिक भी मनमें डरे नहीं
छींके खोलकर (उनसे उतारकर) सब दही-मक्खन खाकर उस घरके लड़कों को पीटकर और सब
बर्तन फोड़कर भाग गये | गोपीने जाकर देखा कि घरमें दहीका कीचड़ हो रहा है, अपने
लड़कोंको उसने रोते पाया | (अब यशोदाजी के पास जाकर बोली-) `सुनो! सुनो! लड़के तो
सभीके हैं किंतु तुम्हारे लड़के जैसे तो कहीं नहीं पाता; सभी उससे डरते हैं | वसन्त
-ऋतु आने पर फाग खेलना तो ठीक है, किंतु तुम्हारा कन्हैया तो सब समय होली खेलता,
तिरछी पगड़ी बाँधता है और पतली गलियोंमें (गोपियोंको) पकड़कर रोक लेता है| बचपनसे
ही तुम्हारे पुत्रने ये ढंग ग्रहण कर रखे हैं | (यह कहती हुई भी वह) मन-ही-मन
(श्यामके द्वारा छेड़े जानेके लिये) ललचा रही है |सूरदासजी कहते हैं कि गोपीकी
बातें सुनकर व्रजरानी संकोचमें पड़ गयी हैं और पछतावा कर रही हैं |
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217