
राग गौरी
सुनु री ग्वारि ! कहौं इक बात |
मेरी सौं तुम याहि मारियौ, जबहीं पावौ घात ||
अब मैं याहि जकरि बाँधौंगी, बहुतै मोहि खिझायौ |
साटिनि मारि करौ पहुनाई, चितवत कान्ह डरायौ ||
अजहूँ मानि, कह्यौ करि मेरौ, घर-घर तू जनि जाहि |
सूर स्याम कह्यौ, कहूँ न जैहौं, माता मुख तन चाहि ||
भावार्थ :-- (व्रजरानी ने कहा-) `गोपी! सुन, तुझसे एक बात कहती हूँ |
तुम सबको मेरी शपथ है- जब भी अवसर पाओ, तुम इसे (अवश्य) मारना | इसने
मुझे बहुत चिढ़ाया है , अब मैं इसे जकड़कर बाँध रखूँगी | छड़ियों से मारकर
इसका आतिथ्य करूँगी |' (यों कहकर) श्रीकृष्णकी ओर देखते ही कृष्णचंद्र डर
गये | माताने (उनसे कहा) `अब भी मान जा, मेरा कहना कर, तू घर घर मत जाया
कर!' सूरदासजी कहते हैं कि माताके मुख की ओर देखकर श्यामसुनदर बोले -`मैया !
मैं कहीं नहीं जाऊँगा |'
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217