
राग सारंग
बाँधौं आजु, कौन तोहि छोरै |
बहुत लँगरई कीन्हीं मोसौं, भुज गहि ऊखल सौं जोरै ||
जननी अति रिस जानि बँधायौ, निरखि बदन, लोचन जल ढोरै |
यह सुनि ब्रज-जुवती सब धाई, कहतिं कान्ह अब क्यौं नहिं छोरै ||
ऊखल सौं गहि बाँधि जसोदा, मारन कौं साँटी कर तोरै |
साँटी देखि ग्वालि पछितानी, बिकल भई जहँ-तहँ मुख मोरे ||
सुनहु महरि! ऐसी न बूझिए, सुत बाँधति माखन-दधि थोरैं |
सूर स्याम कौं बहुत सतायौ, चूक परी हम तैं यह भोरैं ||
भावार्थ :-- (माता कहती हैं-) `आज तुझे बाँध (ही) दूँगी, देखती हूँ कौन खोलता है |
साथ बहुत ऊधम तूने किया |' यह कहकर हाथ पकड़कर (उसे) रस्सीके द्वारा ऊखलसे बाँध
रही हैं | माताको अत्यन्त क्रोधित देखकर मोहनने अपनेको बँधवा लिया और माताके मुखकी
ओर देखकर आँखोंसे आँसू ढुलकाने लगे | यह सुनकर (कि माताने श्यामको बाँध दिया) व्रज
की सब युवतियाँ दौड़ी आयीं और कहने लगीं - `अब कन्हाईको छोड़ क्यों नहीं देती !'
(किंतु) यशोदाजी तो ऊखलसे उन्हें बाँधकर मारनेके लिये हाथसे छड़ी तोड़ रही है |
छड़ी देखकर गोपियोंको उलाहना देनेका) बड़ा पश्चाताप हुआ ( श्यामके पीटे जानेकी
सम्भावनासे ही व्याकुल होकर उन्होंने जहाँ-तहाँ अपना मुख छिपा लिया )| सूरदासजी
कहते हैं- (वे सब बोलीं-) `व्रजरानी! ऐसा तुम्हें नहीं करना चाहिये कि थोड़े-से
मक्खन और दहींके लिये तुमने पुत्रको बाँध दिया| श्यामसुन्दरको तुमने बहुत त्रास
दिया, यह तो भोलेपनके कारण हमलोगोंसे भूल हो गयी (जो उलाहना दिया )'
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217