
राग आसावरी
जाहु चली अपनैं-अपनैं घर |
तुमहिं सबनि मिलि ढीठ करायौ, अब आईं छोरन बर ||
मोहिं अपने बाबाकी सौहैं, कान्हि अब न पत्याउँ |
भवन जाहु अपनैं-अपनैं सब, लागति हौं मैं पाउँ ||
मोकौं जनि बरजौ जुवती कोउ, देखौ हरि के ख्याल |
सूर स्याम सौं कहति जसोदा, बड़े नंद के लाल ||
(श्रीव्रजरानी कहती हैं -) `सब अपने-अपने घर चली जाओ ! तुम्हीं सबने मिलकर
तो इसे ठीढ़ बना दिया है और अब भली बनकर छोड़ने आयी हो | मुझे अपने पिताकी शपथ,
अब मैं कन्हाईका विश्वास नहीं करूँगी |मैं तुम सबके पैरों पड़ती हूँ, अब अपने-अपने
घर चली जाओ ! कोई युवती मुझे मना मत करो, सब कोई श्यामकी चपलता देखो|'
सूरदासजी कहते हैंकि (व्यंग से) यशोदाजी श्यामसुन्दर से कह रही हैं - `तुम सम्मानित
व्रजराजके दुलारे हो न?" (तात्पर्य यह कि पिताके बलपर ऊधम करते थे, अब देखती हुँ
कि पिता तुम्हें कैसे छुड़ाते हैं |)
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217