
राग केदारौ
हरि के बदन तन धौं चाहि |
तनक दधि कारन जसोदा इतौ कहा रिसाहि ||
लकुट कैं डर डरत ऐसैं सजल सोभित डोल |
नील-नीरज-दल मनौ अलि-अंसकनि कृत लोल ||
बात बस समृनाल जैसैं प्रात पंकज-कोस |
नमित मुख इमि अधर सूचत, सकुच मैं कछु रोस ||
कतिक गोरस-हानि, जाकौं करति है अपमान |
सूर ऐसे बदन ऊपर वारिऐ तन-प्रान ||
भावार्थ :-- सूरदासजी कहते हैं - (गोपी समझा रही है-) `श्यामके मुखकी ओर तो
देखो | यशोदाजी! तनिक-से दहीके लिये इतना क्रोध क्यों करती हो ? तुम्हारी छड़ीके
भयसे भीत इसके अश्रुभरे नेत्र ऐसी शोभा दे रहे हैं जैसे भौंरौंके बच्चों द्वारा
चञ्चल किये नीलकमलके दल हों | जैसे सबेरेके समय नालसहित कमलकोष वायु के
झोंकोंसे झुक गया हो,
उसी प्रकार इसका मुख झुका हुआ है और इसके ओष्ठोंसे संकोचके साथ कुछ क्रोध प्रकट
होता है | गोरसकी इतनी कितनी हानि हो गयी, जिसके लिये मोहनका अपमान करती हो |
ऐसे सुन्दर मुखपर तो शरीर और प्राण भी न्योछावर कर देना चाहिये |'
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217