
राग बिलावल
जसुदा ! देखि सुत की ओर |
बाल बैस रसाल पर रिस, इती कहा कठोर ||
बार-बार निहारि तुव तन, नमित-मुख दधि -चोर |
तरनि-किरनहिं परसि मानो, कुमुद सकुचत भोर ||
त्रास तैं अति चपल गोलक, सजल सोभित छोर |
मीन मानौ बेधि बंसी, करत जल झकझोर ||
देत छबि अति गिरत उर पर, अंबु-कन कै जोर |
ललित हिय जनु मुक्त-माला, गिरति टूटैं डोर ||
नंद-नंदन जगत-बंदन करत आँसू कोर |
दास सूरज मोहि सुख-हित निरखि नंदकिसोर ||
भावार्थ :-- (गोपी कहती है-) `यशोदाजी! (तनिक) पुत्रकी ओर (तो) देखो | इस
रसमयी (खेलनेयोग्य) अवस्थाके बालक पर इतना कठोर क्रोध क्या (उचित है)?
यह दही-चोर, बार-बार तुम्हारी ओर देखकर मुख झुका लेता है मानो प्रातःकाल सूर्यका
स्पर्श होनेसे कुमुदिनी संकुचित हो गयी हो | भयके कारण नेत्र अत्यन्त चञ्चल हो रहे
हैं, मानो (दो) मछलियोंको बंशीमें फँसाकर जलमें हिलाया जा रहा हो | वक्षःस्थलपर
वेगपूर्वक गिरती आँसूकी बूँदें अत्यन्त शोभा दे रही हैं, मानो सुन्दर हृदयपर (धारण
की हुई) मोतियोंकी माला ही तागेके टूट जानेसे गिर रही हो | जगत् के वन्दनीय श्री
नन्दनन्दन आज आँखोंके कोनोंमें आँसू भर रहे हैं |' सूरदासजी कहते -`मुझे आनन्द
देनेके लिये नन्दलाल ! अपने इस दासकी ओर (एकबार) देख तो लो |'
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217