
राग धनाश्री
चितै धौं कमल-नैन की ओर |
कोटि चंद वारौं मुखछबि पर, ए हैं साहु कै चोर ||
उज्ज्वल अरुन असित दीसति हैं, दुहु नैननि की कोर |
मानौ सुधा-पान कें कारन , बैठे निकट चकोर ||
कतहिं रिसाति जसोदा इन सौं, कौन ज्ञान है तोर |
सूर स्याम बालक मनमोहन, नाहिन तरुन किसोर ||
सूरदासजी कहते हैं--(कोई गोपी समझा रही है -)`कमल-लोचनकी ओर देखो तो !
ये चाहे साह (चोरी न करनेवाले) हों या चोर हों, इनके मुखकी शोभापर करोड़ों चन्द्रको
न्योछावर कर दूँ | इनके नेत्रोंके किनारे उज्ज्वल, श्याम तथा अरुण दीख पड़ रहे हैं,
मानो चकोर (इस मुखचन्द्रका) अमृत पीने के लिये पास बैठे हों | यशोदाजी ! इनपर
क्यों क्रोध करती हो ? यह तुम्हारी कौन-सी समझदारी है ? अरे श्यामसुन्दर अभी मन
मोहन बालक हैं, कोई तरुण या किशोर तो हैं नहीं |'
Bihar became the first state in India to have separate web page for every city and village in the state on its website www.brandbihar.com (Now www.brandbharat.com)
See the record in Limca Book of Records 2012 on Page No. 217